ABVP ने मनाई सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती

बरहज, देवरिया । आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बरहज नगर इकाई द्वारा नगर स्थित जेनिथ पब्लिक स्कूल पर लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती मनाई गई जिसमें मुख्य रूप से गोरक्ष प्रान्त के प्रांत उपाध्यक्ष डॉ० विनय तिवारी व जिला संयोजक शिवम निषाद उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन नगर मंत्री प्रीति चौहान ने किया वही डॉ विनय तिवारी ने लौह पुरूष के बारे में विस्तृत रूप से विद्यार्थियों को उनके बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि अखण्ड भारत के ब्रांड एंबेसडर है सरदार वल्लभ भाई पटेल सरदार पटेल स्वतंत्रता के समय भारत मे 562 देसी रियासतें थी जिसे सरदार पटेल ने आज़ादी के ठीक पूर्व ही वीपी मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत मे मिलाने के कार्य आरंभ कर दिया था पटेल और मेनन ने  राजाओ को बहुत समझाया कि उन्हें स्वयत्तता देना सम्भव नही होगा इसके परिणामस्वरूप तीन को छोड़कर शेष सभी राजवाडों ने स्वेच्छा से भारत मे विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया केवल जंम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद स्टेट के राजाओ ने ऐसा करना नही स्वीकारा लेकिन बाद में   जूनागढ भी भारत में मिल गया। हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी रियासत थी, जो चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वहाँ के निजाम ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वतंत्र राज्य का दावा किया और अपनी सेना बढ़ाने लगा। पटेल चिंतित हो उठे। अन्ततः भारतीय सेना को हैदराबाद में प्रवेश करा दिया। जिसके तीन दिन के बाद निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और नवंबर 1948 में भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। नेहरू ने काश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अन्तरराष्ट्रीय समस्या है। कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्रसंघ में ले गये और अलगाववादी ताकतों के कारण कश्मीर की समस्या दिनोदिन बढ़ती गयी। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार के प्रयास से कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 और 35(अ) समाप्त हुआ। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया और सरदार पटेल का भारत को अखण्ड बनाने का स्वप्न साकार हुआ। अब जम्मू-कश्मीर केन्द्र के अधीन रहेगा और भारत के सभी कानून वहाँ लागू होंगे। पटेल जी को कृतज्ञ राष्ट्र की यह सच्ची श्रद्धांजलि है।

वही जिला संयोजक शिवम निषाद ने बताया कि सरदार पटेल एक महान राजनीतिज्ञ, किसान ने ता व स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी थे। आंदोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा योगदान 1918 में खेड़ा संघर्ष में हुआ गुजरात का खेड़ा खण्ड उन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में था किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी छूट की मांग की जब यह स्वीकार नही किया गया तो सरदार पटेल गांधी जी एवं अन्य लोगो ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिये प्रेरित किया अंत मे सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी बारडोली सत्याग्रह, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ एक प्रमुख किसान आंदोलन था, जिसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया ।पटेल ने लगान वृद्धि का जमकर विरोध किया। सरकार ने इस सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाए, पर अंतत: विवश होकर उसे किसानों की मांगों को मानना पड़ा। इस सत्याग्रह आंदोलन के सफल होने के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की। किसान संघर्ष एवं राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम के अंर्तसबंधों की व्याख्या बारदोली किसान संघर्ष के संदर्भ में करते हुए गांधीजी ने कहा कि इस तरह का हर संघर्ष, हर कोशिश हमें स्वराज के करीब पहुंचा रही है और हम सबको स्वराज की मंजिल तक पहुंचाने में ये संघर्ष सीधे स्वराज के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सहायक सिद्ध हो सकते हैं। अन्त में उपस्थित सभी को राष्ट्रीय एकता, अखंडता व सुरक्षा की शपथ दिलाया गया। वही इस कार्यक्रम में पंकज शर्मा,गनेश पाण्डेय,प्रहलाद जी व अन्य शिक्षक व सैकड़ो छात्र छात्राएं उपस्थित रहे !

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