देवरिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की सांख दाव पर

प्रदेश अध्यक्ष के गृह जनपद के बगल का जिला है देवरिया ,अजय कुमार लल्लू जिस समाज से आते है उस समाज की बहुलता है, मद्धेशिय वैश्य वोटर निर्णायक । 

मनोज मध्यदेशिया

देवरिया। देवरिया सदर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने अपना पत्ता खोल दिया है लेकिन पार्टी द्वारा चयनित प्रत्याशी को लेकर पार्टी में मतभेदों का जबरजस्त टकराव है। विरोध इस कदर हावी है की एक दिन पहले की घटना सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड हो रहा है और लोग चटखारे ले ले कर टिप्पणी कर रहे है।  ज्ञात हो की एक दिन पहले पार्टी द्वारा चयनित प्रत्याशी मुकुंद भाष्कर मणि को लेकर जिला कांग्रेस पार्टी द्वारा एक परिचय बैठक हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सचिव सचिन नाइक आए थे, चूकि राष्ट्रीय सचिव इस उपचुनाव के पार्टी द्वारा पर्यवेक्षक नियुक्त हुए है और लगातार एक माह से पार्टी के लोगो से मिल कर अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को भेजे। इसी कड़ी में पार्टी नेतृत्व ने मुकुंद भाष्कर मणि को टिकट थमा दिया और उसी परिचय बैठक के दौरान एक महिला नेता द्वारा राष्ट्रीय सचिव के तरफ गुलदस्ता फेंकने और पार्टी कार्यकर्ताओ द्वारा महिला नेता को थप्पड़ों और धक्का मुक्की देकर बाहर निकालने का वीडियों वायरल हो गया। कांग्रेस कुछ समझ पाती कुछ कर पाती विपक्ष के लोगो ने इसे मुद्दा बना दिया।

इस उपचुनाव के साथ प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की सांख भी दाव पर लगी है। अजय कुमार लल्लू के गृह जनपद के बगल का जिला होने के कारण एवं अजय कुमार लल्लू का इस जिले से विशेष लगाव होने के कारण भी यह उपचुनाव कांग्रेस के लिए उसकी सांख बन गयी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू बगल के जनपद कुशीनगर के सेवरही क्षेत्र के विधायक है। अपने कार्यों की बदौलत जनता में सर्वसुलभ होने के कारण 2017 के चुनाव में मोदी आंधी में भी अपनी कुर्सी बचा लेना यह अजय कुमार लल्लू का जनता के प्रति अटूट लगाव, पार्टी के प्रति अपना सर्वत्र त्याग, क्षेत्र के विकास के प्रति सजग व अपने समाज के प्रति जागरूक रहना ही आज अजय कुमार लल्लू को कांग्रेस का सेनापति बना दिया।

अजय कुमार लल्लू का देवरिया से विशेष लगाव है मद्धेशिय वैश्य समाज में उनकी अपनी पकड़ है । मद्धेशिय समाज के लोग अपना नेता मानते भी है। और इस सदर सीट पर मद्धेशिय वैश्य समाज का वोट निर्णायक भी है। अब देखना यह है की क्या मद्धेशिय वैश्य वोट अजय कुमार लल्लू को इस सीट पर स्वीकार करता है या फिर कोई और इतिहास रचने को यह समाज तैयार है। कुल मिला कर अंकगणितीय हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह चुनाव अपनी सांख बचाने के लिए है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है। वैश्य वोटर किसे सपोर्ट करेगा यह आने वाला समय बताएगा लेकिन इतना तय है की इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनो की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है।

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