कोरोना को हराने के लिये करें प्रतिदिन योग प्राणायाम

गड़ेर, भलुअनी, देवरिया। कोरोना की यह दूसरी लहर लोंगों को सम्भलने का मौका भी नही दे रही है । बच्चे, युवा व बुजुर्गों सहित हर वर्ग को अपनी चपेट में ले रही है । बहुत से लोंगों की संक्रमित होने के बाद डिप्रेशन में आने की वजह से भी मौत हो जा रही है, योग प्राणायाम करने से डिप्रेशन दूर होता है जिससे ऐसी परिस्थिति में भी हम मानसिक तौर पर मजबूत बनते हैं । इस चिंताजनक परिस्थिति में योग वेलनेस सेंटर गड़ेर की योग प्रशिक्षिका शाहिन फातिमा ने लोंगों को इस खतरनाक वायरस से खुद को सुरक्षित रखने के लिये परिवार के सदस्यों के साथ प्रतिदिन प्रातः योग प्राणायाम करने की अपील की है ।
उन्होंने योग के महत्व को साबित करते हुए बताया कि योग प्राणायाम को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर वह आज भी स्वस्थ हैं ।
उन्होंने कहा कि योग प्राणायाम तो वैसे भी हर किसी को प्रतिदिन करना चाहिये पर इस समय के परिवेश में तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अपने आप को स्वस्थ रखने के लिये इसे अपने जीवन का दैनिक अंग बनाये । भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उद्गीदन व उज्जायी प्राणायाम ध्यानमग्न होकर शांत वातावरण में आधे से एक घण्टे तक जरूर करें जिससे फेफड़ो को मजबूती मिलती है व सांस सम्बन्धी हर समस्या दूर होती है, रक्तचाप नियंत्रित रहने के साथ रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है, शरीर को ऊर्जा व मन को शांति मिलती है । पावर इम्यूनिटी मजबूत होती है जिससे कोरोना वायरस के संक्रमण से बहुत हद तक बचा जा सकता है । प्रतिदिन प्राणायाम करने से तनाव दूर होता है, आत्मबल मजबूत होता है, बढ़ती उम्र के साथ चेहरों पर झुर्रियां नही आती, बाल जल्दी सफेद नही होते । साथ ही अनेको प्रकार की बीमारियों से स्वतंत्र रहकर आप मानसिक तौर पर भी सुकून व आनन्द महसूस करेंगें ।

आसन प्राणायाम करने के तरीके

भस्त्रिका प्राणायाम – सुबह उठकर नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्नान ध्यान के बाद सबसे पहले भस्त्रिका प्राणायाम करें । पद्मासन की स्थिति में बैठकर गर्दन व रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखते हुये आंखे बन्दकर गहरी सांस फेफड़ो में भरे व फिर उसी तरह नाक द्वारा सांस को बाहर छोड़े, यह क्रिया कम से कम दस बार करें । इसके अलावा अपनी सांस लेने की क्षमता बढ़ाने के लिये इसी क्रिया में सांस को फेफड़ो में भरकर अधिक से अधिक समय तक रोकने की कोशिश करें व फिर छोड़ें । यह क्रिया भी तीन से पांच बार कर सकते हैं ।

कपालभाति – इस प्राणायाम में पेट के द्वारा स्ट्रोक मारते हुये सांसों को नाक के द्वारा बाहर निकाला जाता है, यह क्रिया कम से कम पांच मिनट तक करनी चाहिये। सम्भव हो तो दस से पंद्रह मिनट भी कर सकते हैं ।

अनुलोम विलोम – इस प्राणयाम में नाक से एक तरफ से सांस खिंचकर कुछ देर रोकने के बाद दूसरी तरफ से धीरे धीरे छोड़ा जाता है। दाहिनी तरफ से अगर सांस ले रहे हैं तो एक अंगुली से नाक को दबाकर सांस लेंगे और बायीं तरफ से छोड़ेंगे । यह क्रिया बारी बारी से दस बार करें।

भ्रामरी – इस प्राणायाम में आंखों को दो अंगुलियों से हल्का सा बंद करके, एक अंगुली ललाट पर व एक अंगुली आंखों के नीचे रहती है तथा अंगूठे से दोनों कानों को बंद करके गहरी सांस सीने में भर ले, उसके बाद धीरे धीरे ॐ की ध्वनि के साथ नाक द्वारा सांस छोड़ें । इस दौरान ॐ की ध्वनि मस्तिष्क में गूंजती है और बाहरी आवाज उस समय एकदम नही सुनाई देती।

उद्गीदन व उज्जायी प्राणयाम – इस प्राणायाम में ध्यानमग्न होकर गहरी सांस सीने में भरते हैं फिर मुंह द्वारा ॐ के उच्चारण के साथ सांस को धीरे धीरे छोड़ते हैं । यह क्रिया दस बार करनी चाहिये और कोशिश करनी चाहिये कि एक बार में कम से कम 45 सेकेंड तक ॐ का उच्चारण करें।

योग प्राणायाम के फायदें

योग प्राणायाम के अनगिनत फायदें हैं जिसमें इस कोरोना काल मे सबसे प्रमुख फायदा यह है कि प्राणायाम करने से हमारी इम्युनिटी मजबूत होती है और हमारे शरीर मे आक्सीजन लेवल कम नही होता है जिससे कोरोना संक्रमण होने का खतरा बहुत कम हो जाता है । हर प्राणायाम के बाद दोनों हथेलियों को ऊपर उठाकर कुछ देर रगड़े और हथेलियों के गर्म होने के बाद आंखों व चेहरों पर स्पर्श करें, इससे आंखों की रोशनी बढ़ने के साथ ही चेहरे का तेज भी बना रहता है । जिस तरह रक्तदान के अनेकों फायदें हैं उसी तरह योग प्राणायाम के भी अनगिनत फायदें हैं। आसन प्राणायाम प्रतिदिन करने से मन एकाग्र व शांतचित्त रहता है, स्मरण शक्ति में वृद्धि, आध्यात्मिक लाभ सहित शरीर का हर अंग स्वस्थ व सुरक्षित रहता है।
आजकल की असन्तुलित खानपान, भागदौड़ और तनाव भरे जीवन में योग प्राणायाम को जीवन का अभिन्न अंग बनाकर ही हम सभी ऊर्जावान, सकारात्मक सोच के साथ गुस्से पर नियंत्रण रखते हुये तनावमुक्त, सन्तुष्ट व स्वस्थ रहते हुये शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से सुदृढ़ बन सकते हैं।

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