बहुजन क्रांति मोर्चा ने मनाया बाबा साहेब अंबेडकर की 130 वीं जयंती

भटनी, देवरिया। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर एवं ज्योतिबाफुले की संयुक्त जयंती समारोह भटनी बाजार के हतवा नकहनी में आयोजित कार्यक्रम में मनाया गया। में मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या प्रसाद यादव रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नाथू यादव एवं आयोजक रामाशीष प्रसाद रहे। उद्घाटन हरिलाल बाल्मीकि एवं भटनी नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन विजय कुमार गुप्ता रहे। इस दौरान सभी वक्ताओं ने बाबा साहब अंबेडकर के जीवनी पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि भारत को संविधान देने वाले महान नेता डॉ. भीम राव अंबेडकर का जन्म आज ही के दिन 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से मऊ गांव में हुआ था। डा. भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का भीमाबाई था। अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान के रूप में जन्में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे। भीमराव अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और बेहद निचला वर्ग मानते थे।

बचपन में भीमराव अंबेडकर के परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था. अंबेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्य करते थे और उनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे. भीमराव के पिता हमेशा ही अपने बच्चों की शिक्षा पर जोर देते थे।

इनके जीवन से जुड़ा प्रेरक प्रसंग

बाबासाहेब की ईमानदारी

यह आज़ादी के पहले की घटना है. 1943 में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को वाइसराय काउंसिल में शामिल किया गया और उन्हें श्रम मंत्री बना दिया गया. इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) भी उन्ही के पास था. इस विभाग का बजट करोड़ों में था और ठेकेदारों में इसका ठेका लेने की होड़ लगी रहती थी. इसी लालच में दिल्ली के एक बड़े ठेकेदार ने अपने पुत्र को बाबासाहेब के पुत्र यशवंत राव के पास भेजा और बाबासाहेब के माध्यम से ठेका दिलवाने पर अपना पार्टनर बनाने और 25-50% तक का कमीशन देने का प्रस्ताव दिया।

यशवंत राव उसके झांसे में आ गए और अपने पिता को यह सन्देश देने पहुँच गए। जैसे ही बाबासाहेब ने ये बात सुनी वो आग-बबूला हो गए. उन्होंने कहा- “मैं यहाँ पर केवल समाज के उद्धार का ध्येय को लेकर आया हूँ। अपनी संतान को पालने नहीं आया हूँ। ऐसे लोभ-लालच मुझे मेरे ध्येय से डिगा नहीं सकते।” और उसी रात यशवंत को भूखे पेट मुम्बई वापस भेज दिया. ऐसे थे बाबा साहब अम्बेडकर। बाबा साहब की आज 130 वीं जन्म जयंती पर सभी कार्यकर्ताओं ने नमन किया।

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