अस्पताल में रक्त के सौदागर सक्रिय

देवरिया । बाबू मोहन सिंह जिला चिकित्सालय देवरिया में गम्भीर बीमारी से ग्रसित वृद्ध नेऊर प्रसाद (85 वर्ष) का इलाज चल रहा था जहाँ डॉक्टरों द्वारा मरीज को एक यूनिट ब्लड की आवश्यकता परिजनों को बताई गयी । गरीबी की मार झेल रहे वृद्ध के साथ जिला अस्पताल में उसकी दो शादीशुदा बेटियां थी, वृद्ध का कोई बेटा ना होने के चलते बेटियां ही देखभाल कर रहीं थी । ऐसे में ब्लड की जरूरत होने पर दोनों बहनें परेशान होकर ब्लड के इंतजाम में लगी हुयी थी कि जिला अस्पताल परिसर में कुछ युवकों द्वारा खर्च पानी के रूप में सात हजार रूपये की मांग करते हुये ब्लड दिलाने की बात कही गयी ।

मरीज की बेटी ने यह जानकारी बाहर रह रहे अपने पति को दी, जिसपर उसने गोरखपुर निवासी समाजसेवी रोहतास श्रीवास्तव को इस बारे में बताया । रोहतास श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया के माध्यम से ब्लड उपलब्ध कराने हेतु लोंगों से सहयोग मांगा । ऐसे गरीब परिवार के वृद्ध को ब्लड की जरूरत की जानकारी पाते ही स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी “यूथ ब्रिगेड” के युवा आगे आये और मरीज के लिये ब्लड बैंक के सहयोग से ब्लड उपलब्ध करवाया पर डॉ. प्रतीक केजरीवाल ने परिजनों से मरीज को दिल की बीमारी से अवगत कराते हुये ब्लड चढ़ाना खतरनाक बताया और मरीज को मेडिकल कालेज गोरखपुर ले जाने की सलाह दी । कुछ अन्य युवाओं ने भी इस गरीब परिवार का सहयोग किया ।

अब सवाल यह है कि जिला अस्पताल में ऐसे गरीब व लाचार मरीज कब तक दलालों के शिकार होते रहेंगें ? ऐसे मजबूर लोंगों के लिये क्या जिला अस्पताल की कोई जिम्मेदारी नही बनती है ? गरीब व मजबूर लोंगों के लिये ही सरकारी अस्पताल होता है पर अगर गरीब ही आकर दलाली की भेंट चढ़ जाये तो सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का क्या मतलब ? जिम्मेदार जिला अस्पताल अधिकारी ऐसे प्रकरण पर ध्यान दें नही तो भविष्य में भी ऐसे गरीब परिवार दलालों की बलि चढ़ जायेंगें ।

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