फसल अवशेष व पराली जलाना अपराधिक कृत्य, इसके लिये जुर्माने व कारावास के सजा का प्राविधान-डी0एम0

देवरिया । जिलाधिकारी अमित किशोर ने कहा है कि फसल कटाई के उपरान्त पराली तथा अन्य फसल अवशेषों को कदापि न जलायें। फसल अवशेष जलाने से प्रदूषण को प्रभावित होता है, वही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी खत्म होती है, जिससे फसल उत्पादकता में कमी होती है और कृषि में लागत भी बढ जाती है। फसल जलाने से पर्यावरण संतुलन बिगडने से जन जीवन भी प्रभावित होने की संभावना रहती है। इस लिये हम सभी का कर्तव्य है कि पर्यावरण को बचाने तथा भावी पीढी को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिये किसी भी दशा में किसी भी स्तर के फसल अवशेष को न जलाये। उन्होने आगाह करते हुए कहा है कि फसल जलाना एक अपराधिक कृत्य भी है, इसके तहत जुर्माने व दण्ड का भी प्राविधान है, इसलिये पराली व फसल अवशषों को जलाने से बचे। बिना स्ट्रा रीपर के कम्बाईन का प्रयोग भी कदापि न करें। अन्यथा कम्बाइन मशीन जब्त करने के साथ ही विधिक कार्यवाही की जायेगी।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि खेतो में पराली व अन्य फसल अवशेषों का प्रबंधन करे। मशीनो का प्रयोग कर उसे मिट्टी में पलट दें अथवा वेस्ट डिकम्पोजर प्रयोग कर खेत में ही सडा दें, जिससे जमीन की उर्वरकता बढे और खाद के लिये भी कम खर्च करना पडेगा। उन्होने कहा है कि मा0 सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित न्यायधिकरण के निर्देशो के क्रम में भी फसल अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध है। दो एकड तक 2500 रुपये, 2 से 5 एकड तक 5 हजार रुपये और इससे अधिक रकबा की फसल जलाने पर 15 हजार रुपये के जुर्माने के साथ कारावास के सजा का भी प्राविधान है। इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने पर शासन की तरफ से मिलने वाली विभिन्न योजनाओं के लाभ अनुदान व किसान सम्मान निधि से भी वंचित किया जा सकता है। उन्होने सभी किसान बन्धुओं से अपील के साथ कहा है कि पर्यावरण की सुरक्षा करें, खेतो की उर्वरा सुरक्षित रखे। फसल अवशेष को जलाकर मिट्टी केे सेहत, पोषक तत्वों, सूक्ष्म जीवों के साथ ही आने वाली पीढी का भविष्य नष्ट न करें।

इसी क्रम में उप निदेशक कृषि डा0ए0के0मिश्र ने बताया कि जनपद के सभी कम्बाइन हारवेस्टर मालिको को बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम के कम्बाइन न चलाने के लिये निर्देश दिये गये है। जनपद के सभी 176 न्याय पंचायतों में कृषि विभाग व राजस्वविभाग(लेखपाल) की ड्यूटी लगायी गयी है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में फसल अवशेष प्रबंधन के लिये 6 फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना की गयी है। गतवर्ष जिन ग्राम पंचायतो में पराली जलाने की घटना हुई थी, उन 10 ग्राम पंचायतों में शासन के निर्देशानुसार चयन कर इन सीटू योजना के अन्तर्गत कृषि यंत्रों को क्रय करने की अनुमति दी जा चुकी है तथा जनपद के एक गन्ना समिति को भी फार्म मशीनरी बैंक स्थापना की अनुमति दी गयी है। जनपद स्तर पर फसल अवशेष प्रबंधन हेतु संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों एवं सभी कम्बाईन हारवेस्टर मालिको का व्हाटसप गु्रप बनाकर फसल अवशेष प्रबधन हेतु जागरुक किये जाने का कार्य किया जा रहा है।

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