‘‘सेन्सस-2021 में जातिवार जनगणना व ओबीसी को समानुपातिक कोटा की मांग’’

ओबीसी की जातियों को 3 श्रेणियों में बांटने का मकसद अतिपिछड़ों को न्याय देना नहीं,नफरत फैलाना है-लौटनराम निषाद

रुद्रपुर, देवरिया। आरएसएस नियंत्रित भाजपा शुरू से ही नफरत की राजनीति करती है। पिछड़ों-दलितों में फूट डालों और शासन करो की नीति अपनाकर मतलब साधती रही है। भाजपा पर नफरत की राजनीति का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ. लौटन राम निषाद ने रूद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के मदनपुर,केवटलिया, पटवनिया,भदिला देवार में आयोजित चौपाल व जनसंवाद बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाजपा पिछड़ा- अतिपिछड़ा के नाम पर नफरत की राजनीति करना बंद करे। वोट बैंक के लिए हिन्दू व हिन्दूत्व की बात करती है।जब संविधान सम्मत सामाजिक न्याय,प्रतिनिधित्व, आरक्षण की बात की जाती है तो अतिपिछड़ों, दलितों,वंचितों को दरकिनार कर देती है। समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटन निषाद ने कहा कि पिछडावर्ग के उपवर्गीकरण से पूर्व ओबीसी को जनसँख्या अनुपाती आरक्षण कोटा की व्यवस्था हो।भाजपा सरकार की मंशा अतिपिछड़ों, अत्यंत पिछडों को न्याय देना नहीं,बल्कि लॉलीपॉप दिखाकर इन्हें आपस में लड़ाने व नफरत की भावना पैदा करनी है। उन्होंने कहा, प्रदेश सरकार सामाजिक न्याय समिति-2001 व उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति -2019 की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा सरकार वर्गीय समानुपातिक कोटा देने से क्यों कतरा रही है?पहले ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण कोटा दिया जाय,फिर ओबीसी,ईबीसी,एमबीसी के रूप में विभाजन हो।
रूद्रपुर में सपा पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रमाकांत निषाद के आवास पर प्रेस प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए निषाद ने कहा कि सामाजिक न्याय समिति-2001 के अनुसार उ.प्र. के जातिगत समीकरण में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी 54.5% थी और मण्डल कमीशन के आँकड़े के अनुसार 52.10%, ओबीसी की जातियोंन को मात्र 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया गया,जो संविधान के अनुच्छेद-16(4) के प्रतिकूल है । भाजपा सामाजिक न्याय व संवैधानिक मूल्यों की पक्षधर है तो उक्त वर्गों को सभी स्तरों पर समानुपातिक आरक्षण कोटा देने का कदम उठाये। उन्होंने बताया कि पिछड़े वर्ग की जातियों में 12.91 प्रतिशत निषाद/मछुआ समुदाय की जातियां, 10.48 प्रतिशत यादव, 4.85 प्रतिशत कुशवाहा/मौर्य, 4.01 प्रतिशत कुर्मी, 3.60 प्रतिशत लोधी, 2.38 प्रतिशत पाल/बघेल, 1.94 प्रतिशत जाट, 1.61 प्रतिशत साहू-तेली, 1.31 प्रतिशत राजभर, 1.26 प्रतिशत चौहान, 1.72 प्रतिशत विश्वकर्मा/बढ़ई/लोहार, 1.84 प्रतिशत प्रजापति, 1.11 प्रतिशत नाई ,1.01 प्रतिशत कान्दू/भुर्जी जाति की आबादी के साथ अनुसूचित जातियों में 11.89 प्रतिशत चमार/जाटव व 3.87 प्रतिशत पासी जाति की आबादी थीं। जिनके डीएनए में ही पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों की हक मार रही है, उससे हकदारी की कल्पना करना नासमझी है। भाजपा सबका साथ सबका विकास की बात करती है,पर गिरीश चन्द्र यादव, जयप्रकाश निषाद, धर्मेश कुमार जाटव व सुरेश पासी को राज्यमंत्री बनाकर यादव, निषाद, चमार/जाटव व पासी समाज को अपमानित किया है। इनका ज़मीर ज़िंदा होता व स्वाभिमानी होते तो राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देते।
निषाद ने कांग्रेस व भाजपा को एक ही सिक्के का दो पहलू बताते हुए कहा कि दोनों दल पिछड़े वर्ग के सामाजिक न्याय के मुद्दे पर समान नजरिया अपनाते हैं। कांग्रेस ने काका कालेलकर आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ने मिलकर मण्डल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने में अड़ंगेबाजी खड़ा किया। मण्डल विरोधी भाजपा व कांग्रेस किसी भी सूरतेहाल में पिछड़े वर्ग की हितैशी नहीं हो सकती। जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी की बात करते हुए निषाद ने सेन्सस-2021 में जातिगत जनगणना कराये जाने व ओबीसी को सभी स्तरों पर एससी/एसटी की भाँति समानुपातिक आरक्षण कोटा की मांग की है। निषाद ने बताया कि सामाजिक न्याय समिति के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग की 54.05% अब्दो में पिछड़ी जाति(यादव)-10.48%,अतिपिछड़ी जातियाँ-10.22% व अत्यंत पिछड़े वर्ग की आबादी-33.34% थी।उन्होंने इसी अनुपात में एससी व एसटी की भाँति जनसँख्यानुपाती आरक्षण की मांग किया है।संविधान के अनुच्छेद-115(4),16(4) के अनुसार पिछड़ी जातियों को उनकी जनसँख्या के बराबर आरक्षण कोटा की व्यवस्था होनी चाहिए।जब सामान्य वर्ग की जातियों को ईडब्ल्यूएस के नाम पर 10% कोटा संविधान व सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था व निर्णय के विरूद्ध जाते हुए संविधान संशोधन द्वारा दे दिया गया तो ओबीसी को समानुपातिक कोटा क्यों नहीं दिया जा रहा?
निषाद ने आगे कहा कि आरक्षण पर सपा सरकार को दोषी बताने वाले राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद की बोलती अब क्यों बन्द हो गयी है?भाजपा की तो डबल इंजन की सरकार है,तो क्यों नहीं दिलवा देते निषाद, मल्लाह,केवट, बिन्द, मांझी,कश्यप,राजभर,प्रजापति को अनुसूचित जाति का आरक्षण?वोटबैंक के लिए श्रीराम-निषादराज की मित्रता का व्याख्यान और सरकार बनने पर निषादवंशियों के साथ सौतेला व्यवहार,क्या यही है भाजपा का चाल-चरित्र।अखिलेश यादव की सरकार ने 5 अप्रैल को निषादराज व कश्यप ऋषि जयंती के सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था,जिसे योगी सरकार ने खत्म कर निषाद वंशजों का अपमान किया।जयप्रकाश निषाद अब फूलन देवी की हत्या व कसरवल आरक्षण आंदोलन में मारे गए अखिलेश निषाद की हत्या की सीबीआई जांच की मांग अब क्यों नहीं उठा रहे। उन्होंने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय कुमार निषाद को सौदेबाज, राजनीतिक दलाल व बहेलिया बताते हुए कहा कि एक तरफ यह व्यक्ति अपने समाज की पार्टी की बात करता है,दूसरी तरफ अपने बेटे को उपचुनाव में सपा से व लोकसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ा समाज को बेवकूफ बना रहा है।

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