महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क शुरू

भटनी थानाध्यक्ष व विधायक प्रतिनिधि ने किया शुभारंभ

भटनी, देवरिया। भटनी थाने पर महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ थानाध्यक्ष एवं विधायक प्रतिनिधि डां. संजीव शुक्ला के द्वारा किया गया। थाना परिसर को फूल मालाओं से सजाकर पूरे धूमधाम से महिला कल्याण मिशन शक्ति के तहत इस हेल्प डेस्क का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर डाँ.संजीव शुक्ला ने कहा कि महिलाओं के हित में प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा व उनके मान सम्मान की रक्षा हेतु महिला कल्याण मिशन शक्ति का शुभारंभ किया है। इस मिशन के तहत प्रदेश के प्रत्येक थानों पर महिला हेल्प डेस्क की स्थापना होनी है। इसी कड़ी में आज भटनी थाने पर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क का शुभारंभ हुआ है। इस हेल्प डेस्क के द्वारा महिलाओं के समस्याओं को उचित फोरम पर रखने का मौका मिलेगा एवं इस हेल्प डेस्क के तहत त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

महिलाओं के साथ हुए किसी प्रकार के अन्याय को वर्दाश्त नही किया जाएगा। इस हेल्प डेस्क की सहायता से महिलाएं एवं बच्चे की ओर से कोई भी घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, शारीरिक व मानसिक शोषण, लैंगिक असमानता, बाल विवाह, बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, यौनिक हिंसा, छेड़छाड़ आदि मुद्दो पर बात करने के साथ इससे निपटने का सुझाव भी भटनी थानाध्यक्ष के सामने रख सकते है। इसके अलावा पोषण और स्वास्थ संबंधी मुद्दो एवं किसी भी महिला या बच्चे की किसी प्रकरण में कही सुनवाई नही हो रही है तो वह भी इस हेल्प डेस्क के माध्यम से जिलाधिकारी से सीधे बात कर सकते है।

प्रदेश में महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन के लिए चलाएं जा रहे मिशन शक्ति को हर माह अलग अलग थीम पर मनाने का निर्णय लिया गया है। इस माह की थीम मानसिक स्वास्थ्य तथा मनोसमाजिक मुद्दो से सुरक्षा और सपोर्ट तय की गयी है। महिला कल्याण विभाग द्वारा मिशन शक्ति के तहत बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के साथ संयुक्त कार्य योजना बनाकर इसे चलाया जा रहा है। इससे पहले अभियान के तहत किशोर किशोरियाँ स्थानीय अधिकारियों से शक्ति संवाद के तहत अपनी बात रख चुके है। इस हेल्प डेस्क के द्वारा अन्य असुरक्षित स्थानों की भी सूचनाएं दी जा सकती है।किसी भी विद्यालय के पास शराब की दुकान, विद्यालय के समय आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, किसी घर में महिला या बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा होना। आने जाने वाले रास्ते में लाइट न होने से अंधेरे में असुरक्षित माहौल। विद्यालय में चहारदीवारी, शौचालय, भेदभाव रहित वातावरण का न होना। घरों में शौचालय की व्यवस्था का न होना।

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