गरीब कल्याण रोजगार अभियान से प्रवासी कामगार बनारसी गोंड की सुधरी माली हालत, चेहरे पर है खुशी

सफलता की कहानी

देवरिया । कोविड-19 से प्रभावित प्रवासी श्रमिकों की चिन्ता की गयी, उन्हे कैसे रोजगार मिले, रोजी-रोजगार की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित हो, इसके लिये गरीब कल्याण रोजगार अभियान 20 जून 2020 से 125 दिनो की अवधि के लिये चलाया गया। इस अभियान के अन्तर्गत वापस लौटे प्रवासी कामगारों की परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से उन जनपदों का चयन किया गया, जिनमें वापस लौटे प्रवासियों की संख्या 25 हजार या इससे अधिक है। यह योजना प्रवासी कामगारों और इसी प्रकार प्रभावित जन समुदाय के लिये बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और अवसंरचना के निर्माण के अन्तर्गत विकास खण्ड भलुअनी अन्तर्गत ग्राम पंचायत बरडीहादल के व्यक्तिगत लाभार्थी के रुप में बनारसी गोंड पुत्र विश्वनाथ गोंड का चयन पशु आश्रय बनाये जाने के लिये किये गया। इस लाभार्थी का जाब कार्ड संख्या 010 तथा पात्रता की श्रेणी अनुसूचित जनजाति है। रुपये 81 हजार 210 की लागत से इस लाभार्थी का पशु आश्रय केन्द्र बनाया गया।

सफलता की कहानी लाभार्थी की जुबानी-

हम लाभार्थी बनारसी गोंड पुत्र विश्वनाथ गोंड ग्राम पंचायत बरडीहादल विकास खण्ड भलुअनी का निवासी हूॅ। मेरे पास भैस है, जिसे सुरक्षित रखने के लिये व चारा रखने की कोई समुचित साधन नही था। घास-भूस के मडई में रखने के कारण आधी तुफान व वर्षा के समय काफी समस्या होती थी। गरीब कल्याण योजना की जानकारी मिली, जो मेरे लिये बरदान साबित हुई। विकास खण्ड भलुअनी से सम्पर्क किया गया तो बताया गया कि इस योजना के तहत पशु आश्रय व भूसा रखने के लिये बनवा सकते है। इस योजना के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना के अन्तर्गत पशु आश्रय का निर्माण हुआ, जिससे बहुत ही सुविधा मिली है। अभी कुछ दिन पहले मेरी भैस ने बच्चा दिया है। इस समय दोनो को रखने, चारा आदि के लिये बहुत ही सुरक्षित व्यवस्था हो गयी है। दूध आदि से आय भी हो रहा है। इस योजना से हम काफी खुश है। उहोने यह भी कहा कि इस योजना का लाभ और लोग भी लें। सभी के जीवन स्तर में सुधार होगा और जिस तरह से मेरी हालत सुधरी है, उसी तरह से उनके भी पशु सुरक्षित रहेगें और माली हालात में भी सुधार होगा।

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