पैना शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को किया याद

पैना, बरहज, देवरिया । अगस्त क्रांति में काकोरी कांड स्मृति दिवस के अवसर पर पैना ग्राम शहीद स्थल पर रवि प्रताप सिंह ग्राम प्रधान पैना के नेतृत्व में पैना ग्राम वासियों ने तथा रघुनाथ सिंह इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सहित समस्त अध्यापकों ने अटल कुमार सिंह के नेतृत्व में शहीद स्थल पैना पर काकोरी कांड स्मृति दिवस व अगस्त क्रांति के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उनका नमन और वंदन किया। पुष्पांजलि अर्पित करते हुए अपनी भावभीनी भावनाओं से सभी ग्राम वासियों ने शहीदों के प्रति सम्मान, उनको नमन करके इतिहास के इस पल को आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा का संदेश दिया।

डॉ वीके सिंह पूर्व जोन प्रबंधक, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद गोरखपुर जोन ने बताया कि स्वतंत्र भारत की आजादी की परिपक्वता या 75 वां स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्र रस से भीगा हुआ है। शहीदों की स्मृतियों से आजाद है, वीरांगनाओं के एवं जल समाधि से डूबा हुआ तथा तेजस्वी नेताओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व गरिमा से गौरवान्वित है, लोक चेतना के उत्तर तरंगों से परिपूर्ण है। आजादी का इतिहास शोभायात्रा नहीं किसी घटनाक्रम की कहानी नहीं है बल्कि रक्तरंजित बलिदान की एक गाथा का सोपान है । हमारी आजादी हम सभी के स्वाभिमान का संग्राम था। गमन शोषण के विरुद्ध लोक चेतना का प्रबुद्ध अभियान था।

57 की क्रांति वास्तव में जनमत राजनीतिक सांस्कृतिक विद्रोही था। जनमानस उस से जुड़ा हुआ था । लोक साहित्य एवं उन लोगो में चेतना भी उस क्रांति के आवेग से अछूती नहीं थी। 9 अगस्त 1925 काकोरी कांड की घटना हुई इस घटना में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला, रोशन सिंह को फासी की सजा सुनाई गई। काकोरी कांड में शाहजहांपुर के इन तीन बेटो को फांसी गोरखपुर, फैजाबाद, इलाहाबाद जेल में दी गई। काकोरी कांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने के लिए, हथियार खरीदने के लिए, खजाना लूटने की ऐतिहासिक घटना थी

9 अगस्त के दिन ही 1942 को महात्मा गांधी ने मुंबई से भारत छोड़ो का नारा दिया था तथा लाल बहादुर शास्त्री ने करो और मरो का आह्वान किया था। देखा जाए तो 9 अगस्त 1925 को ब्रिटिश सरकार का तख्ता पलटने के उद्देश्य विश्व के नेतृत्व में हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ के 10 जुझारू कार्यकर्ताओं ने काकोरी कांड किया था जिनकी यादगार में पूरे देश में प्रतिवर्ष काकोरी कांड स्मृति दिवस मनाने की परंपरा भगत सिंह ने प्रारंभ की थी और आज भी भारत की सरकार में इसे निरंतर जारी रखा है और अगस्त महीने को अगस्त क्रांति के नाम से पुकारा है और जनता को राष्ट्रवाद राष्ट्रप्रेम तथा भारत की आजादी के शहीदों को याद कर उन्हीं की तरह शिक्षा प्राप्त कर भारत को विश्व आगे बढ़ाने का शक्तिशाली बनने का प्रेरणा प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा समस्त भारतवासियों को दी है।

अगस्त 1942 को भारत छोड़ो का सही आंदोलन एक जन आंदोलन था उसमें लाखों हिंदुस्तानी शामिल थे बड़ी संख्या में युवा वर्ग आकर्षित हुआ । उन्होंने अपने कॉलेज छोड़कर जेल का रास्ता अपनाया। लाल बहादुर शास्त्री का मरो नहीं मारो का नारा 1942 का संता संग्राम की क्रांति को आग की तरह पूरे देश में फैला दिया और यह आंदोलन सबसे विशाल आंदोलन साबित हुआ जिसमें ब्रिटिश राज की नींव हिला कर रख दिया। 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त क्रांति के नाम से जाना जाता है।

राम प्रसाद बिस्मिल जेल में ही मेरा रंग दे बसंती चोला कविता लिखा था। राम प्रसाद बिस्मिल जेल की अदालत में जाते हुए सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है । यह मजिस्ट्रेट को सुनाते थे। राम प्रसाद बिस्मिल अपनी बहस स्वयं की। धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते हुए उन्होंने सरकारी वकील जगत नारायण मुल्लाजी को बगल झांकने के लिए मजबूर कर दिया, और मजिस्ट्रेट को चकित भी कर दिया। चीफ जस्टिस लुइस शारटस को अंग्रेजी में पूछना पड़ा, रामप्रसाद आपने किस विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली है। बिस्मिल ने हंसकर कहा महोदय सम्राट बनने वालों को डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे थे हमारे क्रांतिकारी नेता जिन्होंने भारत में स्वतंत्रता के लिए हंसते हंसते अपने को बलिदान कर दिया। काकोरी कांड के चार अमर बलिदानी राजेंद्र लाहिरी, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल ठाकुर रोशन सिंह थे।

रवि प्रताप सिंह प्रधान ग्रामसभा पैना ने कहा कि कभी नहीं संघर्ष से इतिहास हमारा हारा है, बलिदान हुए जो वीर जवा उनको नमन हमारा। कण कण सोया शहीद है पत्थर पत्थर इतिहास है। मेरी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारत के 400 शहीद स्थलों से आए हुए पवित्र मिट्टी की कलश पर माल्यार्पण कर अपने तथा समस्त ग्राम वासियों की तरफ से शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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