आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण की हकीकत परखने मैदान में उतरे डीएम, मौके पर पहुंचकर की जांच

देवरिया टाइम्स।

जन शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और वास्तविकता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने आईजीआरएस प्रकरणों का स्थलीय सत्यापन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार को तहसील रुद्रपुर क्षेत्र के ग्राम तिवारी और ग्राम कोइलगढ़हा पहुंचकर शिकायतों के निस्तारण की मौके पर जांच की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सबसे पहले ग्राम तिवारी निवासी इंद्रदेव नायक की शिकायत का भौतिक सत्यापन किया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गाटा संख्या 329 की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने निस्तारण आख्या का परीक्षण करते हुए मौके पर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसके बाद उन्होंने ग्राम तिवारी के ही गौरीशंकर नायक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत की जांच की। शिकायतकर्ता का आरोप था कि गाटा संख्या 616 में निर्माण कार्य के दौरान ग्राम प्रधान एवं अन्य लोग उन्हें रोक रहे हैं। हालांकि स्थलीय जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता स्वयं खलिहान की भूमि, रकबा संख्या 615, पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य करा रहा था। शिकायत असत्य पाए जाने पर जिलाधिकारी ने शिकायतकर्ता को तत्काल अतिक्रमण रोकने की चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसा न करने की हिदायत दी।

जिलाधिकारी ने ग्राम कोइलगढ़हा निवासी संध्या देवी के मामले का भी मौके पर जाकर सत्यापन किया। जांच के दौरान पता चला कि मामला पारिवारिक विवाद से संबंधित है, जिसमें राजस्व विभाग द्वारा दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया गया था। आवासीय हिस्सेदारी से जुड़े विवाद के संबंध में जिलाधिकारी ने फरियादी को उपजिलाधिकारी न्यायालय में धारा-116 के तहत वाद दाखिल कर कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपना अधिकार प्राप्त करने की सलाह दी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी रुद्रपुर अवधेश निगम को निर्देशित किया कि आईजीआरएस शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक तथ्यों और गुणवत्ता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में शिकायतकर्ता असंतुष्ट फीडबैक देता है, उनमें तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्वयं मौके पर जाकर सत्यापन करें तथा केवल लेखपाल या राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर निर्भर न रहें।

जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायत निस्तारण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रकरणों का रैंडम आधार पर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जन शिकायतों का समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन का प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।उपशीर्षक:
असंतुष्ट फीडबैक वाले मामलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्वयं करेंगे जांच, केवल लेखपाल की रिपोर्ट पर नहीं होगा भरोसा

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